आखिर क्या है ट्रम्प की भारत यात्रा के मायने | क्यों नाराज़ हैं ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गरम है. भारत को इस यात्रा से काफ़ी उम्मीदें हैं. हालाँकि ट्रम्प ने अपनी यात्रा से पहले ही ये कह कर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है कि भारत के साथ क़िसी बड़े व्यापारिक समझौते को करने में अभी समय लग सकता है. और इसके लिए नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों तक इंतेज़ार भी करना पड़ सकता है. ट्रम्प ने ये भी कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ अच्छा सलूक नहीं किया लेकिन वो प्रधानमंत्री मोदी को पसंद करते हैं .

भारत अमरीका का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी देश है. साल २०१८ में दोनो देशों के बीच 142 अरब डालर का व्यापार हुआ था.

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Source PixaBay

साल 2019 की पहली तिमाही में अमरीका ने भारत को 45.3 अरब डॉलर का निर्यात किया था. वहीं इस दौरान अमरीका ने भारत से 65.6 अरब डॉलर के उत्पाद एवं सेवाएं आयात की थीं. दोनों देशों के बीच इस दौरान कुल 110.9 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. ट्रम्प भारत पर हर बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि भारत अमेरिका को व्यापार में उतनी तरजीह नहीं देता जितनी की उसे मिलनी चाहिए. ट्रम्प ने भारत की कई अवसरों पर “टेरिफ किंग” या सबसे ज़्यादा आयात शुल्क लगाने वाला देश कह कर आलोचना की है.

ट्रम्प कि भारत यात्रा से ठीक पहले भारत सरकार ने अमेरिका के साथ २.६ अरब डालर के एक रक्षा समझोते को मंज़ूरी दी है. इसके तहत भारत अपनी नौसेना के लिए अमेरिका की रक्षा उपकरण बनाने वाली कम्पनी लॉक्हीड मार्टिन से 24 MH-60R सीहाक हलिकाप्टर ख़रीदेगा.

ट्रम्प भारत और चीन जैसे बड़े बाज़ारों को हमेशा से निशाना बनाते आए हैं. एसा भी माना जाता है कि ट्रम्प की भारत से नाराज़गी किसी और वजह से भी है. भारतीय कानून अमेरिकी डेयरी और पॉल्ट्री ( चिकन, अंडे इत्यादि) उत्पादों को भारत में बेचने की इजाज़त नहीं देते वहीँ ट्रम्प प्रशासन भारत में इन उत्पादों के लिए रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है. भारत का कहना है कि यदि वह अमेरिकी डेयरी और पॉल्ट्री इंडस्ट्री के लिए अपने बाजार खोल देता है तो इसका सीधा असर भारतीय किसानो और छोटे उद्योगों पर पड़ सकता है.
ट्रम्प के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्यूंकि भारत विश्व का एक बहुत बड़ा बाजार है. अमेरिकी डेयरी और पॉल्ट्री उत्पादों के भारत आने पर अमेरिका के किसानों का बड़ा फायदा हो सकता है. पिछले चुनावो में ट्रम्प को जीत दिलाने में अमेरिका के किसानो की एक बड़ी भूमिका रही थी. नवंबर 2020 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हैं तो एक तरह से ट्रम्प अपने वोट बैंक को खुश करना चाहते हैं.