37 करोड़ रोज़ खर्च कर के भी चुनाव नहीं जीत पाया यह उद्योगपति

अमेरिका के अरबपति माइकल ब्लूम्बर्ग करोड़ों डालर खर्च करने के बाद भी राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो गए. वे डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ से अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे. ब्लूम्बर्ग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अब तक के सबसे अमीर प्रत्याशी हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ उन्होंने प्रतिदिन लगभग 37 करोड़ रुपए अपने प्रचार पर खर्च किए. हालाँकि अपनी उम्मीदवारी छोड़ने के बाद उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन को समर्थन देने की घोषणा की है. ब्लूम्बर्ग ने यह घोषणा अमेरिकी प्राइमरी चुनावों में मिली हार के बाद की है.

ब्लूम्बर्ग ने अपने प्रचार में खुले तौर पर खर्च किया. अमेरिकी मीडिया में आइ खबरों के मुताबिक़ उन्होंने प्रचार करने वाले स्टाफ़ के लोगों को आइफ़ोन 11, महँगी शराब और न्यू यॉर्क के रसूखदार इलाक़े मैन्हैटन में पूरी सुख सुविधाओं से लैस फ़्लैट तक दे दिए. उनके स्टाफ़ की तनख़्वाह भी अन्य उम्मीदवारों के स्टाफ़ से दोगुनी थी. यही नहीं उन्होंने अपने समर्थकों को मुफ़्त खाना और टी शर्ट भी बाँटी.

78 साल के माइकल ब्लूम्बर्ग अमेरिका के एक बड़े उद्योगपति हैं. वे प्रतिष्ठित कम्पनी ब्लूम्बर्ग एल. पी. के सह संस्थापक हैं. उनकी कम्पनी शेयर मार्केट,निवेश और मीडिया जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा नाम है. ब्लूम्बर्ग ने इस कम्पनी की स्थापना 1981 में की थी. आज इस कम्पनी की क़ीमत दस बिलियन डालर है और इसके विश्व के कई देशों में कार्यालय हैं.

ब्लूम्बर्ग इससे पहले न्यू यॉर्क शहर के मेयर रह चुके हैं. उनका झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ़ रहा है. हालाँकि एक छोटे से अंतराल के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरफ़ भी हो गए थे. ब्लूम्बर्ग राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार खड़े होने का रहे थे.

वे कई अवसरों पर राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की नीतियों की खुल कर आलोचना कर चुके हैं. हालाँकि अपने निजी जीवन में ब्लूम्बर्ग ने स्वयं कई बार ऐसे बयान दिए हैं जिससे वे विवादों में फँसे हैं. उन पर अभद्र और महिला के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने के भी आरोप लगते रहे हैं.