इज़रायल और UAE ने किया दोस्ती का एलान, फ़िलिस्तीन नाराज़

एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने राजनयिक सम्बन्ध स्थापित करने की घोषणा की है. इस समझौते में अमेरिका ने मध्यस्थता की है. बताया जा रहा है इजरायल वेस्ट बैंक भूमि पर अपनी विवादास्पद योजना को रोकने पर सहमत हो गया है जो इस राजनयिक सम्बन्ध के लिए एक अहम शर्त थी. फ़िलिस्तीनी इस भूमि पर अपना दावा करते हैं. वेस्ट बैंक फलस्तीन का पूर्वी भाग है, जिस पर इजरायल ने 1967 में कब्जा कर लिया था.

मध्य एशिया की राजनीति में यह एक बड़ा अध्याय है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने इसे इजरायल और अरब देशों के बीच एक “नये युग” की शुरुआत कहा है. अभी तक अरब देशों में केवल मिस्र और जॉर्डन के साथ ही इजरायल के राजनयिक सम्बन्ध हैं. मिस्र ने 1979 में इजरायल के साथ शांति समझौता किया था उसके बाद 1994 में जॉर्डन ने ऐसा समझौता किया. इजरायल की आजादी के बाद से यह तीसरा इजरायल-अरब समझौता होगा. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच गुरुवार को फोन पर हुई चर्चा के बाद इस समझौते की मंजूरी दी गई है.

सीएनएन की खबर के अनुसार इस समझौते के बाद इजरायल और UAE एक दूसरे के देशों में दूतावास खोलने पर राज़ी हो गए हैं. सीएनएन ने राष्ट्रपति ट्रम्प के हवाले से कहा है कि इस समझौते को “अब्राहम अकॉर्ड” के नाम से जाना जायेगा. अब्राहम मध्य एशिया के तीनों प्रमुख धर्मों मुस्लिम, ईसाई और यहूदियों में पूज्य हैं.

एसा नहीं है कि इस फ़ैसले से सब ख़ुश हैं. फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता ने इस समझौते को राजद्रोह कहा है. वहीं चरमपंथी संगठन हमास के प्रवक्ता फावजी बरहोम ने कहा, ‘यह इजरायल के अपराधों पर मिला इनाम है. यह हमारे लोगों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है’. एक अन्य फ़िलिस्तीनी चरमपंथी संगठन PLO ने भी इस समझौते की निन्दा की है.

संयुक्त अरब अमीरात मध्यपूर्व एशिया में स्थित एक देश है। सन् १८७३ से १९४७ तक यह ब्रिटिश के अधीन रहा. उसके बाद इसका शासन लंदन के विदेश विभाग से संचालित होने लगा. १९७१ में फारस की खाड़ी के सात शेख राज्यों आबू धाबी, शारजाह, दुबई, उम्म अल कुवैन, अजमान, फुजइराह तथा रस अल खैमा को मिलाकर स्वतंत्र संयुक्त अरब अमीरात की स्थापना हुई.