अमेरिकी चुनाव : ट्रम्प पर बरसे बाइडन, कहा देश को अंधेरे में रखा

डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन ने कहा है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने लम्बे समय तक देश को अंधेरे में रखा. बाइडन ने पार्टी नामांकन स्वीकार करने के बाद अपने पहले संबोधन में ये बातें कहीं. वे डेमोक्रैटिक पार्टी के चार दिवसीय कनवेंशन में बोल रहे थे.

बाइडन ने आगे कहा कि ट्रम्प ने देश में भय और नफ़रत को ही बढ़ावा दिया है.उन्होंने अमेरिकी जनता और अपने समर्थकों से कहा “आपने मुझे राष्ट्रपति पद के लिए चुना तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ करके दिखाऊंगा. मैं उजाले का सहयोगी बनूंगा, अंधकार का नहीं”.

77 वर्षीय बाइडन के जीवन की यह सबसे महत्वपूर्ण स्पीच कहा जा रहा है. बाइडन के पास पचास साल का राजनैतिक अनुभव है और लोकप्रियता के मामले में भी वे फ़िलहाल राष्ट्रपति ट्रम्प से आगे चल रहे हैं. उन्होंने ट्रम्प को एक असफल नेता कहा जिसने संकट के समय में देश की बुरी हालत के लिए ज़िम्मेदार है. उल्लेखनीय है कि अमेरिका कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित है और उसकी अर्थव्यवस्था भी एक ख़राब दौर से गुजर रही है.

उन्होंने अपने भाषण में आगे कहा कि यदि डॉनल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बनते हैं तो आने वाले चार साल भी बीते चार सालों की तरह ही बीतेंगे. आप एक ऐसा राष्ट्रपति चुनेंगे जो किसी चीज़ की ज़िम्मेदारी नहीं लेता और नेतृत्व करने से इनकार करता है. वो हर चीज़ में औरों को दोषी ठहराता है, साथ ही नफ़रत और अलगाव को बढ़ावा देता है. एसा राष्ट्रपति जो सिर्फ़ अपने लिए परवाह करता है अमेरिकियों के लिए नहीं.

इससे पहले डेमोक्रेटिक पार्टी के कनवेंशन में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा ने ट्रंप की आलोचना की और कहा कि “वह हमारे देश के लिए एक गलत राष्ट्रपति हैं जिन्होंने मुश्किल हालात पैदा किए हैं. हम एक ऐसे देश में रह रहे हैं जो गहराई तक बँटा हुआ है”. वहीं उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हेरिस ने कहा कि नस्लवाद की कोई वैक्सीन नहीं है और इसके लिए मिल कर काम करना है.

कौन हैं जो बाइडन

जो बाइडन अमेरिका की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं. वे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय में उपराष्ट्रपति रह चुके हैं. जो बाइडन 1988 में भी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हए थे लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इस से अलग कर लिया था. 2008 में बाईडन ने एक बार फिर अपनी क़िस्मत आज़मानी चाही लेकिन इस बार उम्मीदवारी बराक ओबामा के हाथ लगी. वे लगभग पच्चीस सालों तक अमेरिका के डलवेर से सांसद रह चुके हैं. बाइडन कई उच्च स्तरीय समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं.

बाइडन का प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन पार्टी के विरोध बहुत पुराना इतिहास है. उन्होंने 1991 के खाड़ी युद्ध का खुले तौर पर विरोध किया था. यहाँ उल्लेखनीय है कि 1991 का खाड़ी युद्ध जार्ज बुश सीनियर के समय में हुआ था जो कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता थे. उन्होंने बोस्निया में नाटो की कार्यवाही का भी खुले तौर पर विरोध किया था.

20 नवम्बर 1942 को पेंसिलवेनिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मे बाइडन ने क़ानून की डिग्री ली हुई है. उन्होंने अपना करियर वकालत से शुरू किया. साल 1972 में वे पहली बार अमेरिकी सीनेट के लिए चुने गए.