रूस की कोरोना वैक्सीन के शुरूआती परिणाम अच्छे, मेडिकल स्टडी का दावा

रूस द्वारा तैयार की गई कोविड 19 की वैक्सीन के शुरूआती परिणाम अच्छे आये हैं और शुरुआती परीक्षणों में सभी प्रतिभागियों पर “एन्टीबॉडी रिस्पॉन्स” विकसित हुए हैं. CNN और ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक रूस की इस वैक्सीन ने टी कोशिकाओं में भी एक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है. टी कोशिका एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका है जो शरीर के इम्म्यून सिस्टम को संक्रमण को नष्ट करने में मदद करती है. रूसी अधिकारियों ने पहले ही मोटे तौर पर इसी तरह के बयान दिए थे, लेकिन अब रूस से बहार के विशेषज्ञों ने भी इस बात के प्रमाणित होने के संकेत दिए हैं.

मेडिकल जर्नल दि लान्सेंट में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया है कि सभी इस वैक्सीन के सभी 76 प्रतिभागियों ने वायरस का एंटीबॉडी विकसित किया जो कोविड-19 का कारण बनता है. हालाँकि वैज्ञानिकों, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं हैं, ने कहा है कि यह परिणाम एक सकारात्मक संकेत हैं. लेकिन केवल फेस 3 परीक्षण यह पुष्टि कर सकते हैं कि क्या यह टीका वास्तव में कारगर है.

रूस ने कोरोना की इस वैक्सीन की जानकारी अगस्त में दी थी. स्वयं राष्ट्रपति व्लदीमिर पुतिन ने इसकी जानकारी दी थी. रूस ने इस वैक्सीन का नाम स्पुतनिक-5 (Sputnik V) रखा है कि जो उसके एक उपग्रह का भी नाम है. मॉस्‍को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने एडेनोवायरस को बेस बनाकर यह वैक्‍सीन तैयार की है. पुतिन ने कहा कि वैक्‍सीन सारे जरूरी टेस्‍ट से गुजरी है. दावा किया गया है कि इस टीके का इंसानों पर दो महीने तक परीक्षण किया गया और ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है. अब यह वैक्‍सीन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए भेजी जाएगी. रूस ने कहा है कि वह अक्‍टूबर से देशभर में टीका लगाने की शुरुआत कर सकता है.

दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन पर सवाल उठाये थे. कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि रूस द्वारा टीके में की जा रही जल्दबाज़ी के गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं.