कितना जानते हैं आप “स्कॉच व्हिस्की” के बारे में ?

शराब के शौक़ीनों के लिए “स्कॉच” से बेहतर कोई क़्लासी ड्रिंक नहीं है. स्कॉच के दीवानों को इसके आगे सारी ड्रिंक्स फ़ीकी लगती हैं. स्कॉच की क़ीमत और इसका स्वाद इसे बाक़ी ड्रिंक्स से अलग कर देता है. पर वो कहते हैं ना – एक बेहतरीन स्कॉच की क़ीमत नहीं देखी जाती. आप इस बात से इत्तिफ़ाक़ न रखते हों लेकिन स्कॉच के चाहने वाले तो एसा क़तई नहीं सोचते. पर एसा क्या है जो स्कॉच को इतना ख़ास बनाता है ?

तो सबसे पहले आते हैं नाम पर.

स्कॉच नाम आया है स्कॉटलैंड से. इसका सबसे पहला सन्दर्भ सन 1449 में लिखे गए स्कॉटलैंड के कुछ अभिलेखों में मिलता है. जिनमे इसे “अक्वा विटे ” या फिर “ज़िन्दगी का पानी” कहा गया है. आगे चलकर स्कॉच स्कॉटलैंड के राजघराने और सामंती लोगों की ख़ास ड्रिंक बन गयी.

देखा जाये तो स्कॉच एक तरह की व्हिस्की ही है लेकिन यह है कि स्कॉच व्हिस्की केवल और केवल स्कॉटलैंड में ही बनाई जा सकती है. क़ानूनी रूप से भी केवल स्कॉटलैंड की डिस्टिलरीज़ में बनी स्कॉच ही असली स्कॉच है. स्कॉटलैंड में अभी तक 133 डिस्टिलरीज़ ही स्कॉच बनाने का काम करती हैं. यही नहीं स्कॉच बनाने की विधि भी स्कॉटलैंड के क़ानून के अनुसार ही होनी चाहिए.

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कैसे बनती है स्कॉच

स्कॉच मॉल्टेड जौ से बनाई जाती है. मॉल्ट उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें अनाज के बीजों को अंकुरित कर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. स्कॉच में मॉल्टेड जौ होना अनिवार्य है. हालाँकि इसमें अन्य अनाज भी मिलाए जा सकते हैं. स्कॉच में कम से कम 40% ऐल्कहाल होना चाहिए. लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 94.8% तक हो सकती है. स्कॉटलैंड के क़ानून के मुताबिक़ स्कॉच बनाने वाले जौ या अन्य अनाज को फरमेंट करने लिए केवल यीस्ट ही मिलाया जा सकता है और द्रव के रूप में सिर्फ़ पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है.

स्कॉच को ओक की लकड़ी से बने पीपों में रखकर पुराना किया जाता है. स्कॉच कम से कम तीन साल पुरानी होनी चाहिए. स्कॉच जितनी पुरानी मतलब जितने अधिक सालों तक पीपों में रहती है उतनी ही स्वाद और महँगी होती है. एक बात और, जितने साल तक स्कॉच पीपों में रहती है वही उसकी उम्र होती है. बोतल में आने के बाद स्कॉच की उम्र नहीं गिनी जाती. स्कॉच बोतल की लेबल में स्कॉच का प्रकार, डिस्टलरी का नाम और स्कॉच की उम्र लिखना ज़रूरी है.

उत्पादन के लिहाज़ से स्कॉच पाँच तरह की होती है.

सिंगल मॉल्ट
सिंगल मॉल्ट उस स्कॉच को कहते हैं जो एक ही डिस्टलरी में सिर्फ़ मॉल्टेड जौ से बनाई गई हो. एक ही डिस्टलरी से मतलब है कि सारी प्रक्रिया एक ही डिस्टलरी में सम्पन्न हुई हो.

सिंगल ग्रेन
सिंगल ग्रेन स्कॉच एक ही डिस्टलरी में बनी वह स्कॉच है जिसमें मॉल्टेड जौ के साथ कोई अन्य अनाज भी मिला दिया गया हो जैसे गेहूँ या राई.

ब्लेंडेड मॉल्ट
जब दो या दो से अधिक डिस्टिलरीज़ की सिंगल मॉल्ट स्कॉच को आपस में मिला कर स्कॉच बनाई जाती है तो उसे ब्लेंडेड मॉल्ट स्कॉच कहा जाता है.

ब्लेंडेड ग्रेन
जब दो या दो से अधिक डिस्टिलरीज़ की सिंगल ग्रेन स्कॉच को आपस में मिला कर स्कॉच बनाई जाती है तो उसे ब्लेंडेड ग्रेन स्कॉच कहा जाता है.

ब्लेंडेड
जब दो या दो से अधिक डिस्टिलरीज़ की सिंगल ग्रेन और सिंगल मॉल्ट को आपस में मिला कर स्कॉच बनाई जाती है तो उसे ब्लेंडेड स्कॉच कहा जाता है.

स्कॉच की वजह से स्कॉटलैंड की अर्थव्यवस्था को भी बहुत फ़ायदा हुआ है. आँकड़ो के मुताबिक़ साल 2017 में स्कॉटलैंड से लगभग 4.7 बिलियन पाउंड की स्कॉच का निर्यात किया गया. स्कॉटलैंड में लगभग चालीस हज़ार लोगों को इस इंडस्ट्री ने रोज़गार दिया हुआ है.