राजस्थान सरकार ने ब्लैक फ़ंगस को महामारी घोषित किया, क्या है ब्लैक फ़ंगस

भारत में राजस्थान सरकार ने ब्लैक फ़ंगस को एक महामारी घोषित कर दिया है. सरकार ने कहा है कि ब्लैक फंगस खतरनाक रूप लेते जा रहा है और यह कई राज्यों में तेजी से फैल रहा है, इसलिए इसपर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है. कोरोना से ठीक हुए मरीज़ों में इस बीमारी के लक्षण देखे जा रहे हैं. हालाँकि प्रभावित मरीज़ों की संख्या बहुत कम है.

इस बीमारी के लक्षण हैं – नाक बंद हो जाना, नाक से ख़ून या काला तरल पदार्थ निकलना, आंखों में सूजन और दर्द, पलकों का गिरना, धुंधला दिखना और आख़िर में अंधापन होना. मरीज़ के नाक के आसपास काले धब्बे भी हो सकते हैं.

क्या है ब्लैक फ़ंगस

ब्लैक फंगस या काली फफूँद एक दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है. मेडिकल की भाषा में इसे म्यूकोरमाइकोसिस कहते हैं. ये वैसी ही फफूँद है जो अक्सर पुरानी ब्रेड, सब्ज़ियों इत्यादि में लग जाती है. यह हमारे वातावरण में मौजूद रहती है. ये फंगस हर जगह होती है. मिट्टी में और हवा में. यहां तक कि स्वस्थ इंसान की नाक और बलगम में भी ये फंगस पाई जाती है.

ये फंगस साइनस, दिमाग़ और फेफड़ों को प्रभावित करती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों या बेहद कमज़ोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों जैसे कैंसर या एचआईवी/एड्स के मरीज़ों में ये जानलेवा भी हो सकती है.

म्यूकरमायकोसिस में मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक होती है. डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 के गंभीर मरीज़ों को बचाने के लिए स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से ये संक्रमण शुरू हो रहा है. वहीं डायबटीज़ के मरीज़ जो कोरोना से संक्रमित हुए हैं, उनपर भी ब्लैक फ़ंगस के लक्षण देखे गए हैं.