Category Archives: कविता

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना – पाश

अवतार सिंह संधू “पाश” की ये कविता हर युग में हर देश में और हर समाज में उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अस्सी के दशक में थी. 23 मार्च 1988 को जलंधर में खलिस्तानी आतंकवादियों की गोली ने पाश की जान ले ली. लेकिन पाश मारा नहीं करते. प्रस्तुत है पाश कि कालजयी कविता. मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं

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